देश कोरोना महामारी के कहर से जूझ रहा है, जिसके तहत ‘लाॅकडाऊन’ का पालन करवाने के लिये पुलिस सड़क पर है। कुछ ऐसा ही नजारा फतेहपुर जिले में भी है लेकिन यहां कल्याणपुर थाना अंतर्गत एक चौकी इंचार्ज व एक सिपाही की संदिग्ध भूमिका सुर्खियों में है। फिर भी उच्च अधिकारियों द्वारा शिकंजा नहीं कसा जाना कई सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि फतेहपुर जिला के थाना असोथर ने पिछले दिनों जहां 10 पेटी देशी शराब( 450 पौवा ) के साथ 01 अभियुक्त गिरफ्तार किया था, वहीं कल्याणपुर थाना क्षेत्र में अंग्रेजी शराब माफियाओं की सक्रियता रही। जिन पर नकेल लगाकर पुलिस गिरफ्त में नहीं ले पाई। ‘सशक्त समाज न्यूज’ की खबर के बाद हड़कंप तो मचा लेकिन सिर्फ बिक्री सुस्त हुई। फिलहाल कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा वाहन चेकिंग में भी भेदभाव देखने को मिल रहा है। एक समाजसेवी की मानें तो जरूरी कार्य से बाजार दवा आदि लेने जाने वाली जनता के वाहनों को रोककर दोगली नीति अपनाया जाता है, सक्रियता दिखाने चेकिंग में चालान काटकर रसीद थमा दी जाती है। यदि रसूखदार की गाड़ी है या पुलिसकर्मियों के जान-पहचान वाले हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। ऐसे ही मामले कल्याणपुर थाना अंतर्गत चौडगरा चौकी क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुये हैं। सुत्रों के मुताबिक चौडगरा चौकी क्षेत्र में दोपहर से शाम के वक्त चौकी से चंद कदमों की दूरी पर पुल के नीचे चेकिंग लगाई जाती है, जहां कुछ पुलिसकर्मी जांच के नाम कुछ गाड़ियों का चालान काटकर रसीद तुरंत पकड़ा देते हैं, जबकि कुछ गाड़ियों को चालान करने के बहाने बगल में बनी चौकी में लाया जाता है। इसके बाद में उन्हें सेटलमेंट करके छोड़ दिया जाता है। इससे हर दिन यहां मोटी रकम वसूली जाती है लेकिन मजबूर जनता पर रहम नहीं किया जाता।
क्षेत्रीय चर्चा – वाहन चालकों से सेटलमेंट खेल का मास्टरमाइंड भी शराब माफियाओं में गहरी पैठ रखने वाला सिपाही सुरेश यादव ही है, जोकि बरसों से आसपास क्षेत्र में ही डियुटी पर तैनात रहा है। कुछ लोग तो इसे भी जातिय सांठगाठ के नजरिये से देख ढ़िढ़ोरा पीटते नजर आ रहे हैं कि थानाध्यक्ष के भी ‘यादव’ होने के नाते सिपाही सुरेश यादव का पावर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। यह वसूली धनराशि का पैसा ऊपर तक पहुंचाया जाता है। खैर..मामला चाहे जो भी हो लेकिन चौकी इंचार्ज के खासम-खास इस मास्टरमाइंड सिपाही के पीछे किसका हाथ है, यह जांच का विषय है।
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