‘भक्तों’ के ‘कल्याण’ के लिए ‘भगवान’ तोड़ देते हैं सारे नियम, खाखरनाथ मंदिर में ‘कारूणिक गीतों’ पर ‘छलके आंसू’…

भदोही जनपद के तहसील ज्ञानपुर अंतर्गत जंगीगंज क्षेत्र के जगापुर में स्थित खाखरनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के संगीतमय प्रवचन में अयोध्या से पधारे संत निर्मल शरण महराज ने कथा में सुदामा चरित का बड़ा ही मार्मिक प्रवचन सुनाया। प्रवचन सुनने के दौरान कई श्रोताओं के आंखों में आंसू भी भर आये।

निर्मल शरण महराज ने कहा कि सुदामा गरीब थे लेकिन द्ररिद्र नही थे। बल्कि संतोषी ब्राह्मण थे सुदामा। भक्तों के दुखी होने पर भगवान स्वयं दुखी हो जाते हैं। भगवान का आंसू भक्त के आंखों से आंसू के रूप में निकलता है। कहा कि सुदामा ने गरीबी की कठिनाईयों के बावजूद भी अपने ब्राह्मण धर्म को कभी भी नही छोड़ा। सुदामा केवल पांच ही घर भिक्षा मांगते थे, छठें घर नही जाते थे। चाहे सुदामा को पांच घर में भिक्षा में कुछ मिले या न मिले। सुदामा की इसी भक्ति के वजह से परमपिता परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण अपने गरीब मित्र सुदामा के पैर को अपने आंखो से निकले आंसूओं से धो डाला। यह एक भक्त की जीत ही थी, भगवान स्वयं अपने भक्त का भक्त बन गये और सारे नियम तोड़ दिये। महराज ने आगे वर्णनात्मक बताया कि भगवान अपने भक्तों के लिए अपने ही द्वारा बनाये गये सभी नियम तोड़ देते है। सुदामा अपने जीवन में पहली बार तब रोये जब उनके घर में भगवान को भोग लगाने के लिए कुछ नही था। सुदामा बच्चों और पत्नी के साथ स्वयं भूखे रहने पर नही रोये बल्कि भगवान को भोग न लगाने से सुदामा रोये। बताया कि मित्रता बराबरी के लोगों के साथ करनी चाहिए। मित्र तो वही होता है जो मित्र के दुख के दिनों में साथ दे। और बराबरी की बात को ध्यान में रखकर सुदामा द्वारिकाधीश से कुछ मांगने के लिए नही गये। कहा कि जब समय खराब होता है तो न बोलने वाले भी बहुत कुछ बोल देते है। जब सुदामा भिक्षा पाते तो इसलिए खुश हो जाते कि आज भगवान को भोग लगाऊंगा। इसीलिए नही खुश होते कि मैं और मेरा परिवार खायेगा। सुदामा ने अपनी गरीबी को भक्ति के आगे कभी नही आने दिया।

आगे की कथा में महराज जी ने कहा कि कथा में घरेलू बातचीत करने पर गौहत्या का पाप लगता है। इससे अच्छा है कि कथा में बात करना हो तो कथा सुनने न जाये। क्योकि भगवान के शरण में जो जिस भाव से जाता है भगवान उसे उसी भाव से फल देते हैं। किसी आयोजन के संदर्भ में कहा कि कही भी किसी परिचित, रिश्तेदार या धार्मिक समारोह में जायें तो खाली हाथ नही जाना चाहिए। कथा के दौरान कई कारूणिक गीतों को सुनकर उपस्थित लोगों के आंखों से आंसू छलक पडे़। इस मौके पर काफी संख्या में प्रवचन सुनने वालों की भीड़ रही।

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