गंगा है, यमुना है, हनुमान चालीसा है, कुरान है, संविधान है, इंकलाब के नारे हैं, कट्टा है, गोली है, यह दिल्ली के विधान सभा चुनाव की रंगोली है। पाकिस्तान है, आतंकवाद और आतंकवादी है, हिंदू हैं, मुसलमान हैं, भेड़ियाधसानी घमासान है। पुलिस है, डंडा है, झंडा है, भाषणों में आग है और सामने शाहीन बाग है। वे बोले यह संयोग नहीं प्रयोग है! उनकी प्रयोगधर्मिता गुजरात से शुरू होकर वाया मुजफ्फरनगर अब बंगाल तक पहुँच चुकी है। हाथ, झाड़ू, कमल, कीचड़, लालटेन, बंगला में दंगल है, आपके लिए सब कुशलमंगल है। वादे हैं, इरादे हैं. जुमले हैं, हमले हैं। बड़े-बड़ों की रैली है, कहीं लिफाफा, कहीं थैली है। भारतमाता की जय है, बिटिया जामाता की जय है। जुकाम खांसी मुद्दा है, तिहाड़ में फांसी का मुद्दा है। इनकी. उनकी, सबकी हवा है, हर बीमारी की एक दवा है। राष्ट्रवाद का चूरन है, कोई कम कोई पूरन है। कमान संभाले नायब है, नड्डा, तिवारी गायब है। राजा है, परजा है, फ़क़ीर है, यह दिल्ली चुनाव की तस्वीर है।
लंकेश्वर कौन.! – मामाजी के ट्वीट ने बहुत बड़ा भ्रम पैदा कर दिया है। दिल्ली की चुनावी महाभारत द्वापर से उछलकर त्रेता में प्रवेश कर चुकी है और जय हनुमान ज्ञान गुन सागर से वोटों की गागर भरने का महायज्ञ जारी है। एक निजी चैनल के आश्रम में दिल्ली में मुख्यमंत्री ने अपने हिंदू प्रेमी होने के सबूत के तौर पर पूरी हनुमान चालीसा सुना दी और कहा कि मैं हिंदू विरोधी नहीं हूँ। इस बयान की पूंछ पकड़कर मामाजी के नाम से ख्यातिप्राप्तमध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए ट्विटरिया दिया, ‘हनुमानजी से आज के ‘लंकेश्वर’ भी भयभीत होते हैं। बोलो महाबली श्री हनुमान की जय!’ यहीं पर ट्विस्ट ये है कि ‘लंकेश्वर’ है कौन? बात लंकेश्वर की होगी तो सीताहरण का प्रसंग भी आयेगा! जिन्हें हाईकोर्ट से शिष्या के साथ बदतमीजी के मामले में जमानत मिली है वे क्या कहे जायेंगे और जो उन्नाव कांड के नायक है उनसे किसे भयभीत होना चाहिए? कथा रुकनी नहीं चाहिए मामू !


