उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपनों को जमीं पर उतारनें में भले ही अधिकांश ग्राम प्रधान व सेकेट्ररी ५० -६० प्रतिशत ही सक्रियता निभाने सक्षम हों लेकिन यदि मुख्य विकास अधिकारी ही गांव की गलियों में सक्रियता दिखा रहें हैं तो गांव-समाज अपेक्षाओं में मुख्य विकास की लालसा बसा लेता है। कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है इन दिनों भदोही जनपद में।
गौरतलब है कि भदोही जनपद के ‘सीडीओ साहब’ यांनि मुख्य विकास अधिकारी विवेक त्रिपाठी अचानक किसी भी गाँव में पहुंच जाते हैं। जिस गांव में पहुंचते हैं…चौपाल वहीं लग जाती है लेकिन कुर्सी पर बैठकर दरबार सजाने से ज्यादा विकास कार्यों की गुणवत्ता व नई योजनाओं को क्रियान्वित करवाने हेतु गांव की गलियों की खाक छानने में इनकी अत्यधिक अभिरूचि नजर आती है। कहीं वनवासियों के छत की फिक्रमंदी तो कहीं बच्चों-बुजुर्गों की सुविधा हेतु नये विकास कार्यों हेतु सेकेट्ररी-प्रधान को नसीहत। इतना ही नहीं जरूरत पड़ी तो शासनिक मिजाज में नजर आ जाते हैं, जिसके बाद अधीनस्थ अधिकारियों सहित सेकेट्ररी-प्रधान सहित विकास निर्माण कार्य ठेकेदारों की नींद हराम हो जाती है।

मुख्यमंत्री आवास – जनपद के विभिन्न गांवों में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री आवास पर सबसे पहले नजर डालने में माहिर सीडीओ विवेक त्रिपाठी दो दिनों पूर्व जनपद के छेछुआ, वीरापुर गांव में वनवासियों हेतु निर्माणाधीन मुख्यमंत्री आवास का निरीक्षण करते नजर आये। गांव की गलियों में अन्य विकास कार्यों की भी हकीकत देखा। जहां शासनिक अंदाज में चेताया कि तीन दिन के अंदर छत कार्य के साथ आवासों के पास खड़ंजा आदि लगाने का निर्माणकार्य कार्य शुरू हो जाना चाहिये, अन्यथा पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

खेल मैदान विकास – मुख्यमंत्री आवासों के निरीक्षण से वनवासियों के लिये छत और स्वच्छता अभियान हेेतु शौचालय जैसे कई कार्य का निरीक्षण तो जारी ही था लेकिन अब तालाब व बच्चों-बुजुर्गों के लिये खेल मैदान विकास पर मुख्य प्रयास करते हुये गांव-समाज के लोगों में सार्वजनिक सुविधा-संसाधन विकास कार्यों की अपेक्षाओं को बढ़ा चुके हैं। सीडीओ विवेक त्रिपाठी ने प्रधान और सचिवों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत में खेल का मैदान विकसित किया जाए। इसके लिये वीरा पुर जैसे कई ग्राम पंचायत में तो जमीन भी निर्धारित हो चुकी है। खैर…तालाब व खेल मैदान जैसे सार्वजनिक संशाधनों का विकास यदि जमीं पर हुआ तो बच्चों से बुजुर्गों तक के लिये ‘योगीराज’ में यह विशेष तोहफा साबित होगा।



जसवाँ गाओं का विकाश जमीं पर कम कागजों में ज्यादा है