विपुल पांडेय की रिपोर्ट…✒️
काशी-प्रयाग मध्य – श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का दिव्य क्षण हो तो धार्मिक ध्वजवाहकों की नगरी भजन-कीर्तन से सज जाती है, जनप्रतिनिधियों के साथ स्थानीय नेताओं की तलाश भी शुरू हो जाती है। यहां निर्छल मन से पक्ष-विपक्ष के नेता धार्मिकता के रंग में रंगीन होते हैं। खैर..भदोही जनपद के कांग्रेसी जिला उपाध्यक्ष राजेश दूबे के पुरेभान निवास पर पहुंचने पर निमंत्रकों को मायूसी हाथ लग रही है क्योंकि वे निवास स्थान पर ही नहीं बल्कि जनपद में भी उपस्थित नहीं है।
गौरतलब है कि काशी-प्रयाग मध्य के भदोही जनपद में मरणासन्न पड़े विपक्ष की भूमिका को जीवंत करने में कांग्रेसी जिला उपाध्यक्ष राजेश दूबे की विगत् वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। गोवंश एवम् छूट्टा पशुओं के संरक्षण एवम् किसानों की फसलों की सुरक्षा के मुद्दे पर इन्होंने सत्ताधारी भाजपा के पहलवान नेता, किसान मोर्चा अध्यक्ष सांसद वीरेंद्र सिंह (मस्त) को किसानी इस कदर सीखाया कि इन दिनों वे भी ‘कर्मभूमि’ भदोही-मिर्जापुर छोड़कर ‘जन्मभूमि’ बलिया में सांसद बनने के साथ खेती-बाड़ी कर रहे हैं। राजेश दूबे भी मानते हैं कि वीरेंद्र सिंह (मस्त) एक अनुभवी एवम् कुशल राजनेता रहे हैं, जिन्होंने गोवंश संरक्षण हेतु राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ तक विपक्ष की आवाज पहुंचाकर करोड़ों की योजना का क्रियान्वयन करवाया और केंद्र से किसान सम्मान योजना भी लेकर आये।
कलयुगी जेल नहीं, हेडक्वार्टर में सरेंडर..
काशी-प्रयाग मध्य’ में जब स्थानीय कृष्ण भक्तों की मांग पर ‘सशक्त समाज’ के इस संवाददाता ने राजेश दूबे की तलाश की तो पता चला वे दिल्ली दरबार में कांग्रेस के अकबर रोड स्थित मुख्य कार्यालय में डेरा जमाये हैं और जब पूछा गया कि श्रीकृष्ण का जन्मदिन पी. चिदंबरम के पास मनाने जेले में जा रहे हैं क्या…तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया कि इस कलयुगी जेल में न्याय नहीं मिलेगा। हम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर धार्मिक-अध्यात्मिक नगरी मथुरा-वृंदावन क्रुर कंस की जेल सरेंडर करने जा रहे हैं, जहां श्रीकृष्ण का जन्म होगा और कंस का कुछ ही वर्षों में अंत क्योंकि ग्रंथ- पुराण गवाह कि सत्तादंभ का अंत होता है। इस कलयुगी राजनैतिक महाभारत में श्रीकृष्ण के आशिर्वाद से यही कांग्रेस जनहित में विपक्ष रूपी अर्जुन की भूमिका है और नहीं रहती तो उन्नाव और सोनभद्र की घटनाओं में न्याय नहीं मिलता और आम जनमानस के दुख-दर्द से सत्ताधारी पार्टी लेना-देना ही नहीं है।


