कल्याण नगरी के आस-पास शहरों में सैकड़ो की संख्या में उत्तरभारतीय सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता और उत्तर भारतीय समाज को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से रविवार शाम कल्याण के अग्रवाल कॉलेज हाल में लोगों को एकजुट किया गया। सभी को सभा में को बोलने का मौका दिया गया, जहां लोगों ने दिल खोलकर अपनी भड़ास भी निकाली। कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ उत्तर भारतीय समाज फेडरेशन बनाने की सभा पूरी हुई. जिसमें कांग्रेसकालिन पूर्व मंत्री कृपा शंकर सिंह, चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी सहित कई गणमान्यों ने हिस्सा लिया। गौरतलब है कि एक दौर था जब उत्तर भारतीय समाज के 7/8 नगरसेवक व नगराध्यक्ष भी हुआ करते थे, वर्तमान में सीमित होते हुए आज मात्र 1 नगरसेवक हैं। मात्र 1 नगरसेवक की भूमिका को भाजपा के टिकट पर जीते मनोज राय ने गौरवान्वित कर दिया। अन्यथा कभी राजनैतिक दहलीज पर ‘हीरो’ की भूमिका वाला उत्तर भारतीय समाज ‘कंडोमपा’ अंतर्गत शायद ‘जीरो’ पर होता। खैर..कल्याण में समाज को एकजुट करने के लिए रविवार की शाम एक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया था. इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी बबन चौबे और शिवसेना पदाधिकारी एवम् हिन्दी भाषी जनता परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष विश्वनाथ दुबे ने संस्थागत व्यक्तिगत अहंकार और आत्म अभिलाषा के ऊपर प्रकाश डालते हुये पूर्व कांग्रेस कालिन मंत्री कृपाशंकर सिंह और दैनिक ‘नवभारत’ के स्थानीय संपादक बृजमोहन पांडेय को प्रयत्न के लिए शुभकामना दी। विश्वनाथ दुबे ने कल्याण मे जब उत्तर भारतीयों पर विपत्ति आई तब किसी भी उत्तर भारतीय नेता द्वारा कल्याण के उत्तर भारतीय लोगों को संरक्षण नहीं मिलने की बात उठाई। एक मात्र महिला वक्ता श्रीमती सीमा तिवारी ने समाज मे महिलाओं की 50% सहभागिता की चर्चा की।
पंकज मिश्र ने अपने अंदाज़ में कृपाशंकर सिंह को विश्वास दिलाया की ठाणे एवं कल्याण का उत्तर भारतीय समाज उनके साथ पहले भी था और अब भी है।
एनसीपी के नेता पारसनाथ तिवारी ने कल्याण के उत्तर भारतीयों की व्यथा सभा के सामने रखी। उनकी बातों से यह समझा जा सकता था किवे बताना चाहते थे कि मुंबई से आए विशिष्ट अतिथियों को गलतफहमी हैं कि सिर्फ 2-3 लोग ही कल्याण के उत्तर भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
रमाशंकर(चंदू) तिवारी ने कल्याण के उत्तर भारतीय समाज द्वारा बनाए गए “उत्तर भारतीय भवन”, केएम अग्रवाल महाविद्यालय आदि की उपलब्धियों की चर्चा करते हुये कृपाशंकर सिंह को वचन दिया की कल्याण का पूरा उत्तर भारतीय समाज उनके साथ खड़ा है।
कांग्रेसी डॉ. आरबी सिंह ने कृपाशंकर सिंह का अभिवादन करते हुये के एम अग्रवाल महाविद्यालय की स्थापना में उनके विशेष योगदान पर चर्चा की और उन्हे आश्वासन दिया की वे उनके साथ हैं और “फेडरेशन” बनाने की उनके संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए वे हर प्रयास करने को तटस्थ हैं।
अंत में कृपाशंकर सिंह ने “फेडरेशन” बनाने के पीछे की मूल भावना के साथ-साथ , उत्तर भारतीय समाज के लोगों के बीच आपस में पिछले कुछ वर्षों से रहे तनाव आदि की विस्तृत चर्चा की। अपनी चिर-परिचित शैली में उन्होनें सभी उपस्थित व्यक्तियों को अपनेपन का एहसास कराया।
मुख्यतः आयोजन तो सफल बताया जा रहा है लेकिन कांग्रेसी विचारधारा के नेताओं का दरबार लगने से भाजपा से जुड़े अधिकांश स्थानीय उत्तर भारतीय समाजसेवी एवम् नेताओं ने जहां दूरी बना रखी थी, वहीं कुछ भाजपाई मानते हैं कि चुनाव करीब आते ही नेताओं एवम् संस्थाओं को समाज की याद आती रहती है। इसी तरह शिवसेना की उत्तर भारतीय ईकाई के जिला अध्यक्ष सर्वेश उपाध्याय कहते हैं कि उत्तर भारतीय समाज के लोगों को अब अपना हित समझ में आता है। यदि संस्थाओं का मेल होता तो शायद जरूरतमंद उत्तर भारतीयों को अत्यधिक सेवाभावी योजना मिल सके।
✒️…ब्यूरो – सुरेश चौहान


