भूचाल बना ‘अजय भट्टाचार्य’ का यह लेख, पापराजी पत्रकारिता के दौर में…..
मुंबई की गलियों में हिन्दी पत्रकारिता का भीष्मपितामह अजय भट्टाचार्य को यूं ही नहीं कहा जाता है बल्कि बालासाहब ठाकरे के दौर में हिंदी दैनिक ‘दोपहर का सामना’ के बाद ‘नवभारत’ जैसे सुप्रसिद्ध अखबारों में संपादकीय विभाग को अग्रलेख के सरोकार से जोड़ा. ‘सरल गीता’ के रचयिता एवम् वर्तमान में ‘भजन-कीर्तन’ के संपादक अजय भट्टाचार्य…


