मोहम्मद गौरी को चुनौती, पढ़िये ‘माँ शारदा’ के दो सपूत…

मैहर धाम ‘माँ शारदा धाम’ से जुड़ी कई लोककथाएं चर्चित हैं, जिसमें मां शारदा के अनन्य भक्त आल्हा और उदल की भी शामिल है। मंदिर के पुजारी बताते हैं, महोबा निवासी दो वीर योद्धा भाई आल्हा और उदल 800 वर्ष पूर्व हुआ करते थे। उन्होंने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था और मोहम्मद गौरी को भी चुनौती दी थी। दक्षराज और देवल देवी के बड़े पुत्र आल्हा को पौराणिक परंपराओं में युधिष्ठिर का अवतार माना गया है, जिनका जन्म सामंती काल में हुआ था। सबसे पहले जंगलों के बीच मां शारदा देवी के मंदिर की खोज आल्हा ने की थी। आल्हा ने इस मंदिर में 12 वर्षों तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था। कहा जाता है कि आल्हा-उदल को मां ने अमरत्व का वरदान दिया था। मैहर मंदिर में हर रात को आल्हा और उदल नाम के दोनों चिरंजीवी दर्शन करने आते हैं अर्थात माई की सबसे पहले पूजा आल्हा और उदल ही करते हैं। अभी भी मां का पहला श्रृंगार आल्हा ही करते हैं और जब ब्रह्म मुहूर्त में मां शारदा मंदिर के पट खोले जाते हैं, तो पूजा हो चुकी रहती है। ‘सशक्त समाज’ परिवार की उपस्थिति में भी मैहर धाम यात्रा होती रही है. जहां जलपान, महाप्रसाद भंडारा, विश्राम के साथ संगीतमय सुंदरकांड पाठ व रात्री जागरण की व्यवस्था की जाती है। संलग्न तस्वीर में मैहर धाम स्थित आल्हा-ऊदल के अखाड़े में दो-दो हाथ करके मिट्टी का तिलक लगाते मैहर_धाम_यात्रा के आयोजक (राष्ट्रीय कवि) देवराज मिश्र व कलमकार सुनील तिवारी ‘बहुरूपीय’ नजर आ रहे हैं।

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