भ्रष्टाचारी पुतले का भी दहन, यहां भस्म होता रहा है अहंकार.!

काशी-प्रयाग मध्य – धर्म ध्वजवाहकों की नगरी में रामलीला मंचन की तैयारियां शुभारंभ हो चुकी हैं। ऐसे में धार्मिक-संस्कृति विरासत स्वरूप प्राप्त धरोहर को जीवंत रखने की होड़ में युवाओं का तन-मन-धन से समर्पित रहना लाजमी है। खैर..’रामलीला समिति पिलखुना, पुरेमटुका चकसारनाथ, हरिहरपुर, पुरेनगरी’ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया है कि ‘विगत कई वर्षों से जागृत धार्मिक धरोहर ‘रामलीला मंचन’ यहां इस वर्ष 12 अक्टूबर से शुभारंभ होकर 22 अक्टूबर को सम्पन्न होगा। पिछले वर्ष रामलीला में आप सभी का उत्साह- जुनून उपस्थिति एवम सहयोग काबिले तारीफ रहा, जिसके लिए हृदयतल साधूवाद कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है।’धर्म हेतु समर्पित रहेंगे तो..                                                              धर्म हेतु समर्पित रहेंगे तो धर्म भी हमारी भी रक्षा करेगा..ऐसा संदेश देते हुए बताया गया है कि “भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम चन्द्र जी के कार्य मे अगर आप तन-मन या धन से जितना सहयोग हृदयतल करते हैं तो उससे कई गुना ज्यादा प्रभु श्रीराम आपको विभिन्न माध्यमों से प्रसाद स्वरूप लौटाते हैं। आप बुध्दजीवी हैं किसी भी अहंकार में ना आयें कि जो कर रहे हैं या दे रहे हैं…वो हम हैं क्योंकि अहंकारी पुतले का ही सदैव दहन हुआ और रावण ने तो प्रभु से मोक्ष प्राप्त कर लिया था। हम और आप निमित्त मात्र कठपुतली हैं। हमारे ईश्वर ने हमें और आपको पुश्तैनी धरोहर हेतु धार्मिक प्रचार-प्रसार का सौभाग्य दिया, वहीं पुण्यात्मक महाप्रसाद है।

भ्रष्टाचार के पुतले का भी दहन…
हम और आप सदैव रावण के अहंकारी पुतले का दहन करते आये हैं लेकिन आज कलयुग में भ्रष्टाचार के दहन की आवाज स्वयं धार्मिक नेतृत्वकार राज्य के मुखिया ‘योगी महराज’ उठा रहे हैं। ऐसे अहंकारी पुतले के साथ भ्रष्टाचार के भी पुतले का दहन करके इस वर्ष सर्वसमाज की एकात्मकता एवम् मानवता को जागृत किया जायेगा क्योंकि भ्रष्टाचार से जनहितार्थ कार्यों की बलि चढ़ने से जनसामान्य वर्ग भी असुविधाओं से ग्रसित है।

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