महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में उत्तर भारतीय ब्राम्हणों की उपस्थिति है। अब ऐ ब्राम्हण भले ही पूर्वजों-बुजुर्गों की तरह संस्कृताचार्य नहीं लेकिन पुजापाठ एवम् धार्मिकता के अलखकार बतौर सभ्यता-संस्कार के संयोजक हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की जहां धूम है, वहीं संगीतमय सुंदरकांड पाठ को भी उत्तर भारतीय धर्म ध्वजवाहक संयोजकों ने गणेशोत्सव का अभिन्न हिस्सा बनाने में सफलता हासिल की है।
गौरतलब है कि धार्मिक पराकाष्ठा तब विशेष मजबूत हो जाती है जब विशेष पराक्रमी पवन पुत्र हनुमान को महाराष्ट्र के लोग यहां का भूमि पुत्र बतौर गौरवान्वित करते हैं। प्रभु श्रीराम की सेना के पराक्रमी नेतृत्वकार हनुमानजी को कलयुग का प्रबल देवता भी माना जाता है। मुंबई, थाना, कल्याण सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में हजारों स्थान पर अब गणेशोत्सव के दौरान संगीतमय भजन संध्या के साथ हनुमानी पराक्रम गाथा की प्रस्तुति उत्तर भारतीय युवा ब्राम्हणों द्वारा संपन्न करवाया जाता है। इसी क्रम मुंबई के पश्चिमी उपनगर जोगेश्वरी स्थित मिश्रा कंपाउंड (गुफा के बगल) में जोगेश्वर नाथ के सानिध्यरत शनिवार को सुन्दरकाण्ड पाठ एवं भजन की जोरदार संगीतमय प्रस्तुति सुर साधकों ने किया। विगत् वर्षो कि भांति इस वर्ष भी यहां उत्तर भारतीय ब्राम्हण सपूतों ने सभ्य समाज की धार्मिकता संस्कृति को जीवंत रखा। हनुमानी धरा पर आसन लगाकर जब बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया जा रहा था तो एक विशेष संस्कृति की विरासत को संजोने का एहसास हो रहा था। खैर..धार्मिकता एवम् संस्कृति की होड़ है तो ‘राष्ट्र प्रधान’ भी युवाओं के जहंन में रहता है। इसरो की अपार सफलता पर ‘जय श्री राम’ के जयघोष से देश के वैज्ञानिकों को बधाई और शुभकामनाएं भी समर्पित की गई।
मुख्य आयोजक घनश्याम मिश्रा, उमेश शर्मा, विजय मिश्रा व पवन देवीचरण मिश्रा सभी अतिथियों का आभार प्रगट किया। वाद्ययंत्र ढ़ोलक संदीप पाण्डेय की थाप और सुर साधक पवन मिश्रा सहित अतुल मिश्रा को विशेष सम्मानित किया गया।
✒️..विशाल तिवारी 🥀मुंबई ⛳धार्मिक खबर


