राजस्थान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में भिवंडी के भगवान महावीर रोड स्थित महावीर भवन के गुरु श्रेष्ठ पुष्कर देवेंद्र दरबार में विराजित राष्ट्रसंत दक्षिण सम्राट श्री नरेश मुनिजी म.सा. ने कहा कि माता-पिता अपने लिए तीर्थ हैं, माता-पिता का अपने ऊपर बहुत उपकार है।
उन्होंने कहा कि प्रभुवीर का प्रथम संदेश है कि माता-पिता का दिल दुखाना नहीं। आज तो संतान अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में भेज देते हैं, स्नान तन को,दान धन को,दया मन को और ज्ञान आत्मा को पवित्र करती है। आपको पवित्र बनना है तो माता-पिता की सेवा करो, प्रभु महावीर ने स्वंय कभी माता-पिता का दिल नहीं दुखाया। भगवान महावीर ने माता की सकता के लिए गर्भ में हिलना-डुलना बंद कर दिया था। वर्तमान में पुत्र जो चाहे जो करे उसमें पिता को न चाहते हुए भी सहमति देनी पड़ती है। जो बेटा मां के बिना घड़ी भर नहीं रहता था वही बेटा आज मां के साथ एक घड़ी भी बैठना पसंद नहीं करता है, कमाल है। माता-पिता की सेवा जो नहीं करेगा वह कभी भी सुख प्राप्त नहीं कर सकता है। 

प्रखर वक्ता श्री शालिभद्रजी बहुत रोचक एवं आध्यात्मिक ढंग से अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया और बहुत ही मार्मिक भजन प्रस्तुत किया। साध्वी डॉ. दर्शनपरभाजी ने कहा कि जिन माता-पिता ने अपने सुख की उपेक्षा की और अपने प्राण प्यारे लाडले का जतन किया, आज वही लाडला बेटा अपने माता-पिता के उपकार को ही भूल गया है। वृद्ध पशुओं की तरह उन्हें वृद्धाश्रम में भेज देता है। साध्वी समृद्धिजी ने कल्पसूत्र का वाचन किया।


