उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सरकारी शासनादेशों के अनुसार प्रधान प्रतिनिधि बतौर (प्रधान के पति/रिश्तेदार) को ब्लॉक कार्यालयों या सरकारी बैठकों में प्रधान की जगह भाग लेने की अनुमति नहीं है. यह नियमावली सीधे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (प्रधानों) की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लागू है।
- अनधिकृत प्रवेश पर रोक: आधिकारिक कार्यों की बैठकों और प्रशासनिक ब्लॉक कार्यालयों में प्रधान की जगह प्रतिनिधि (पति व पुत्र आदि) की उपस्थिति पर कानूनी प्रतिबंध है।
- प्रशासनिक अनुपालन: विकास खंड अधिकारी (BDO) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि केवल निर्वाचित प्रधान ही आधिकारिक बैठक में आएं।
- भ्रष्टाचार पर अंकुश: इस नियम का उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को रोकना है।
यदि प्रधान महिला हैं तो स्वयं उन्हें ही ब्लॉक पर जाकर पंचायत के कार्यों का संचालन करना चाहिए. उनके पति या किसी अन्य प्रतिनिधि को ब्लॉक पर जाकर विभागीय बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं है।



