न खुदा ही मिले, न विसाले सनम…थोक के भाव में भारतीय जनता पार्टी के भर्ती सत्र में अपनी पार्टी बदलकर भाजपा का झंडा-डंडा थामने वाले उत्तर भारतीय नेता इन दिनों ठगा महसूस कर रहे हैं। महाराष्ट्र में चुनावी बयार ने रंग पकड़ लिया है और नामांकन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है लिहाजा इस बात की संभावना भी खत्म हो गई है कि ऐन समय पर उम्मीदवार बदला जा सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुंबई के उत्तर भारतीय समाज ने भाजपा की झोली भर दी थी और उसे मुंबई की 36 में से सर्वाधिक 15 सीटें मिलीं थीं। उत्तर भारतीय वोट बैंक की ताकत पहचानकर भाजपा ने मुंबई में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया था। उन्हें कहा गया था कि 2019 के विधानसभा चुनाव में उनको उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन भाजपा ने उन्हें किनारे कर दिया है। निवर्तमान राज्यमंत्री विद्या ठाकुर और रमेश सिंह को उम्मीदवारी देकर अन्य उत्तर भारतीय नेताओं को ठेंगा दिखा दिया है। रमेश सिंह को उनकी चहेती सीट से न उतारकर मालाड (प.) से चुनावी दंगल में उतारा गया है जिससे उनकी संभाव्य जीत पर अभी से संदेह व्यक्त किया जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व विधायक राजहंस सिंह, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री व फिल्मसिटी के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र, पूर्व विधायक अभिराम सिंह, मृत्युंजय पांडेय, मनोभव त्रिपाठी, संजय पांडेय जैसे दर्जनों उत्तर भारतीय नेता हैं, जिनका राजनीतिक करियर दांव पर है। भाजपा इन्ही नेताओं के सहारे मुंबई और आसपास के करीब 50 लाख उत्तर भारतीयों के वोट बैंक पर नजर गड़ाए बैठी है। मृत्युंजय पांडेय प्रदेश उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि संजय पांडे प्रदेश भाजपा सचिव और मनोभव त्रिपाठी भाजपा युवामोर्चा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष रहे हैं और प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य हैं। वर्सोवा सीट पर संजय पांडे तैयारी भी कर रहे थे। एक और महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब भाजपा जीतने की हालत में नहीं थी तब उत्तर भारतीयों को उन सीटों पर चुनाव मैदान में उतारा था जिन पर हार निश्चित थी। मसलन 2004 में भायखला सीट से रमानाथ त्रिपाठी और मालाड सीट पर आर. यू. सिंह को और 2009 में कालीना से एड. दीनानाथ तिवारी को मैदान में उतारकर उत्तर भारतीय समाज को हिस्सेदारी देने की खानापूर्ति भर की गई। इन चेहरों को न तो 2014 और न अब कोई तबज्जो दी गई है। बहरहाल जिनको उम्मीदवारी मिली है वे कितना सफल होते हैं यह 24 अक्टूबर को साफ होगा।
न खुदा ही मिले, न विसाले सनम…


