उपचुनाव के विरोध में उम्मीदवार पहुँचे न्यायालय जून के पहले सप्ताह में होगी मामले की सुनवाई

मुंबई (सं.भा.)। फर्जी जाति प्रमाण की वजह से जिन चार नगरसेवको के पद रद्द हुए हैं, एन पदों को भरने के लिए फिलहाल उप चुनाव नहीं कराये जाएंगे। राज्य चुनाव आयोग की तरफ से उप चुनाव के लिए जारी अधिसूचना पर मुंबई उच्च न्यायलय ने १२ जून तक के लिए रोक लगा दी है। चार नगरसेवकों का नगरसेवक पद रद्द होने के बाद दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों ने नगरसेचक पद पर अपना अधिकार जताते हुए मुंबई उच्च न्यायलय में याचिका दायर की है।

पिछले मनपा चुनाव में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीट से निर्वाचित कांग्रेस के राजपति यादव, भाजपा की केसरबेन पटेल, कांग्रेस की स्टेफी किणी का नगरसेचक पद जाति प्रमाण पत्र नहीं दे पाने की वजह से रद्द कर दिया गया है।

जिसकी वजह से चुनाव आयोग ने वार्ड क्रमांक २८, ३२, ७६, एवं ८१ मे उपचुनाव कराने की तैयारी शुरु की है। जिसको लेकर कुछ दिनों पहले ही एक अधिसूचना जारी की गयी है। पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के उम्मीदवार नितीन सलाग्रे, शिवसेना की गीता भंडारी, संदीप नाईक एवं शंकर हुंडारे ने नगरसेवक पद पर अधिकार जताते हुए उच्च न्यायलय में याचिका दायर की है।

चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि फिलहाल मतदाता सूची को ठीक करने के लिए अधिसूचना जारी की है, अभी तक चुनाव की घोषणा नहीं की गयी है। मतदाता सूची की जांच पूरी होने के बाद चुनाव की तारीख घोषित की जा सकती है।

याचि्ाका पर सुनवाई अवकाश कालीन न्यायलया में न्यायधीश झय गडकरी एवं निजामुद्दीन जमादार की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने कहा कि जाति प्रमाण के कुछ मामले अभी भी प्रलंबित हैं।

जिसकी वजह से आयोग इस तरह से उपचुनाव नहीं करा सकता है। अचानक चुनाव कराये जाने से अदालत में प्रलंबित दूसरे मामले प्रभावित हो सकते हैं।

उच्च न्यायलय ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद १२ जून तक चुनाव घोषित करने पर रोक लगा दी। इस मामले की सुनवाई जून के पहले सप्ताह में हो सकती है।

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