सशक्त परदेशी (01) – ‘भदोही’ के ‘गुलजारी’, यहां कर रहे हैं ‘मानवता’ गुलज़ार…

‘कलयुग’ में भले ही ‘समाज शास्त्र’ का ज्ञान, ‘अल्प विद्या भयंकरी’ की ‘भेंट’ चढ़ चुका है लेकिन ‘इच्छाशक्ति’ से सामाजिक ‘परोपकार’ करने में ‘सशक्त परदेशी’ ही ‘नेतृत्वकार’ हैं। मुख्यतः इनके ‘अंतर्मन’ में ‘जाति-धर्म’ से परे ‘मानवता’ का वास होता है। ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक सामाजिक-धार्मिक कार्यों में प्रयासरत रहनें वाले ही ‘सशक्त परदेशी’ हैं, जिनकी…

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