दिल को खटके,
जरा हटके…
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धंधेबाज नेताजी को अब, करिये ना यूं बदनाम
भ्रष्टाचारी हों या कलंकी, सम्मान से लीजै नाम
सम्मान से लीजै नाम, स्वार्थ का ठेला सजाइये
दरबारी बनिये खुशमय, दलाली जमिके खाइये
कहे ‘बहुरूपीय’ मौन, कुर्सी सजी सत्तामय आज
दिव्य मंडियों में जमावड़ा, सम्मानीय हैं धंधेबाज
एस. टी. ‘बहुरूपीय’ (९३२४००६२६९) आपका व्यंग्यकार, आपकी आवाज..📢
(स्तंभ वर्ष – १२) 💘’जन्मभूमि’ की ‘मिट्टी’ का ‘तिलक’ लगाता हूँ, हाँ…’झूट्ठों की नगरी’ में भीी ‘सत्य नारायण’ कथा ‘सुनाता’ हूँ.! 🔥😅


